दिशा निर्देश

रोगियों के लिए सामान्य दिशा-निर्देश

नये रोगी केवल पूर्वनिर्धारित समय पर देखे जाएँगे. समय लेने के लिए क्लीनिक में सम्पर्क करें तथा नये रोगियों के लिए उपलब्ध निर्देश-सूची अवश्य प्राप्त करें.

अपने नंबर पर अनुपस्थित रोगी को नंबर पुनः लगाना होगा.

होमियोपैथी द्वारा आप बहुत सी बीमारियों का सफल उपचार कर सकते हैं और अनावश्यक शल्य क्रिया से बच सकते हैं.

शल्य चिकित्सा एक महत्वपूर्ण और सम्मानीय चिकित्सा विधा है तथा कुछ स्थितियों में यह अति आवश्यक और अपरिहार्य है. हमारा उद्देश्य अन्य संभावित उपचारों के बारे में बताना है न कि शल्य चिकित्सा को कम आँकना.

पूरे प्रयासों के बावजूद कुछ बीमारियों में पूर्णकालिक लाभ मिलना लगभग असंभव है.

होमियोपैथिक चिकित्सा में चिकित्सक बेहद महत्वपूर्ण है अतः अपने होमियोपैथिक चिकित्सक का चुनाव बेहद देखभाल कर करें. होमियोपैथी को छोड़ने से पहले अपने होमियोपैथ को बदल कर देखें.

अपने चिकित्सक को पूरी बात बताएँ, आपकी नज़र में कुछ तकलीफें अलग-अलग भले ही दिखाई दें पर आपस में संबंधित हो सकती हैं और एक दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं.

होमियोपैथिक उपचार में वर्तमान बीमारी के साथ-साथ पुरानी बीमारियों तथा परिवार में चल चुकी बीमारियों के बारे में भी बताएँ कि आपके माता-पिता, भाई-बहन इत्यादि को कौन सी बीमारियाँ चल रही हैं या रह चुकी हैं भले ही वह व्यक्ति जीवित है या नहीं, साथ रह रहा है या नहीं.

भूलने से बचने के लिए अपने रोग से संबंधित मुख्य बिंदु काग़ज़ पर नोट कर लाएँ. पैथोलॉजी, एक्स-रे व अन्य जाँचें आपके रोग के बारे में समझने के लिए आवश्यक हैं तथा होमियोपैथिक इलाज में भी उपयोगी हैं. कृपया पुरानी रिपोर्ट ले कर आएँ और आवश्यक नई जाँचें कराने में अपने चिकित्सक के साथ सहयोग करें.

विशेष (इनके बारे में अवश्य बताएँ)

क्या आप किसी चीज़ के लिए संवेदनशील हैं जैसे खाने की चीज़ें, गंध, धूल, परिस्थिति, मौसम इत्यादि?

क्या आपकी तकलीफें किसी समय विशेष में होती हैं जैसे दोपहर, सुबह, शाम, रात, बदलता मौसम, केवल दिन, केवल रात, खाने के बाद, सोने के बाद, चलने के बाद, सो कर उठने के बाद, माहवारी से पहले या बाद, सेक्स के बाद इत्यादि?

यदि आपको कोई सपने बार बार दिखाई देते हैं तो चिकित्सक को अवश्य बताएँ.

यदि परिवार में किसी को कोई जन्म-जात रोग रहा है जैसे दिल में छेद, कोई अंग [अँगुलियाँ इत्यादि] कम या ज़्यादा होना, होंठ या तालू फटा हुआ होना, मल या मूत्र द्वार का न बना होना इत्यादि रहा हो तो चिकित्सक को अवश्य बताएँ.

यदि किसी तकलीफ़ के लिए कोई अन्य दवा ले रहे हैं या अन्य इलाज चल रहा है तो अवश्य बताएँ.

आपके भाई-बहन, माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-ताऊ-बुआ, मामा-मौसी आदि निकट संबंधियों में किसी को भी कोई तकलीफ़ रही है तो उसका उल्लेख अवश्य करें, विशेष रूप से साँस, टीबी, डायबीटीज़, गुर्दे की बीमारियाँ, थायराइड, कैंसर, ट्यूमर, गाँठें, ब्लड प्रेशर, हर्निया, बवासीर, काँच निकलना, नासूर, जोड़ों की तकलीफ़, माइग्रेन, पागलपन, अवसाद [डिप्रेशन] आदि. यदि आपको बचपन में या किसी अन्य समय खाँसी, निमोनिया, दस्त, पीलिया, खसरा, चेचक, मलेरिया, डेंगू, फोड़े-फुंसी, पथरी इत्यादि रह चुकी हैं या अन्य कोई बीमारी ज़ुकाम, बुखार आदि बार-बार होना रह चुका है तो अवश्य बताएँ.

यदि पिछले समय में त्वचा के रोगों जैसे दाने, फोड़े-फुंसी, दाद, खारिश, खुजली या खाल चटकना आदि के लिए दवा खाते या लगाते रहे हैं जैसे क्रैक क्रीम, बेटनॉवेट, जालिम लोशन, इचगार्ड आदि, अथवा पहले आपको पित्ती, एकज़ीमा या अन्य कोई एलर्जी आदि रही है अथवा कान बहने की शिकायत रही है तो अवश्य बताएँ.

जीवन शैली

आपकी जीवन शैली इलाज को प्रभावित करती है अतः इस संबंध में दिए गये सुझावों / निर्देशों का कठोरता से पालन करें.

खान-पान, सोना-जागना, रहन-सहन, व्यायाम और काम के घंटे और तरीके आप की जीवन शैली के ही अंग हैं इन पर ध्यान दें.

रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना आपकी जैविक घड़ी को सुचारु रखते हैं और आप बहुत से रोगों विशेष रूप से हॉरमोन संबंधी रोगों से बचाव कर पाते हैं. आसानी से समझने के लिए जिस तारीख में आप सो कर उठें उसी तारीख में रात को सोना आवश्यक है अर्थात रात 12 बजे से पहले सो जाएँ.

नींद आसानी से आए इस के लिए अपने आप को शेष दुनिया से डिसकनेक्ट करना सहायक होगा अतः फोन, कंप्यूटर और टी वी को सोने के समय से कुछ समय पहले बंद कर दें. बचे हुए समाचार, संदेश और संवाद आप अगले दिन पढ़ सकते हैं.

किसी भी अन्य नशे की तरह सोशल मीडिया या इंटरनेट का नशा भी आपकी मानसिक कमज़ोरी का परिचायक है और उसी तरह इस का भी उपचार होता है और किया भी जाना चाहिए.

एक दिन में सदा 24 घेंटे ही रहेंगे. अपने सभी कार्यकलापों को इसी सीमा रेखा में यथोचित समय दें. शेष बचे काम अगले दिन के लिए रख दें. लालच सदा ही बुरी बला है.

अपने कामों की प्राथमिकता के अनुसार सूची बनाएँ और उस सूची के अनुसार कार्य करें. ध्यान रहे जीवन में स्वास्थ्य से अधिक मूल्यवान प्राथमिकता कोई और नहीं. बड़ी-बड़ी उपलब्धियाँ पाना हो या सुख भोगने का आनंद लेना हो इस शरीर का स्वस्थ होना अति आवश्यक है.

अपने दिन में से आधा घंटा किसी रचनात्मक या खेल-कूद वाली गतिविधि को दें. यह आपको मानव बनाए रखने में और मशीन बनने से रोकने में सहायक होगी. व्यायाम के मुक़ाबले अपने प्रियजनों, मित्रों के साथ खेलने को प्राथमिकता दें.

भोजन का समय नियमित रखें. भोजन की मात्रा नियत रखें. भोजन अच्छी तरह चबा कर खाएँ. भोजन के समय ध्यान बाँटने वाली गतिविधि जैसे टीवी देखना आदि न करें.

दिन भर पानी भरपूर पिएं पर पानी भोजन से आधा घंटा पहले या आधा घंटा बाद पिएं. भोजन इतना चबा कर खाएँ कि भोजन के बीच कम से कम पानी पीना पड़े.

होमियोपैथिक उपचार विशेष

उपचार के दौरान तेज़ खुशबू वाली चीज़ों के इस्तेमाल से बचें.

दवा और खाने-पीने की चीज़ों के बीच आधे घंटे का अंतराल रखें पर पानी कभी भी पी सकते हैं. दवा खाली पेट भी खा सकते हैं.

स्वास्थ्य और निरोग के लिए आपका एकमात्र गंतव्य

डॉक्टर सुधांशु आर्य
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